मन के हारे हार है

  • शशिकांत निशांत शर्मा

Abstract

मन क्योंकि सभी इच्छाओं का केंद्र है, सभी दृश्य-अदृश्य इंद्रियों का नियामक और स्वामी है। अत: व्यवहार के स्तर पर उसकी हार के वास्तविक हार और जीत को सच्ची जीत माना जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण और मन की दृढ़ता की बात भी बार-बार कही जाती है।

Published
2019-05-09