विज्ञान एक वरदान

  • हिमांशु शेखर

Abstract

शास्त्र, साहित्य, कला, सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान तथा अन्य जो कुछ भी इस विश्व में अपने सूक्ष्म या स्थूल स्वरूप में विद्यमान है, उन सबका एकमात्र एंव अंतिम लक्ष्य मानव-कल्याण या हित-साधन ही है। इससे बाहर या इधर-उधर अन्य कुछ भी नहीं। इससे भटकने वाले, इधर-उधर होने वालीं प्रत्येक उपलब्धि, योजना और प्रक्रिया अपने आपमें निरर्थक और इसलिए त्याज्य है। यही सृष्टि का सत्य एंव सार-तत्व है। सभी प्रकार की उपलब्धियों, साधनाओं, क्रियाकलपाओं और गतिविधियों का उद्देश्य या लक्ष्य मानव-कल्याण ही है और रहेगा। इसी मूल अवधारणा के आलोक में ही ‘विज्ञान और मानव कल्याण’ या इस जैसी किसी भी अन्य विषय-वस्तु पर विचार किया जा सकता है।

Published
2019-05-15