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Abstract

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग जनजाति बहुल क्षेत्र है। इस क्षेत्र में जनजातियां की स्थिति देखने पर ज्ञात होता है कि यहॉ जनजातियों के जीवन स्तर को ऊॅचा उठाने हेतु आधारभूत सुविधाओं की कमी है। षिल्पकला के क्षेत्र में देखा जाए तो षिल्पकला जनजातियों की संस्कृति, सभ्यता व विचारों की अभिव्यक्ति का एक माध्यम रही है परन्तु वर्तमान में हस्तषिल्प कला के माध्यम से बस्तर संभाग में, जनजातियों में मानव संसाधन विकास दृष्टिगोचर हो रहा है। जिस षिल्प कला का पूर्व में छोटे स्तर पर प्रदर्षन होता था, अब उसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गयी है। हस्तषिल्प कलाओं ंने ग्रामीण क्षेत्रों मे रोजगार का सृजन किया है। इसके माध्यम से जनजातियों के जीवन स्तर में आर्थिक सुधार देखा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रो में जहां अधिकांष जनजातियों के द्वारा जीवन यापन हेतु कृषि, मजदूरी आदि कार्य किए जाते हैं, वहीं अब अधिकांष जनजातियां इन विभिन्न हस्तषिल्प कलाआें के माध्यम से भी जीविकापोर्जन कर रही हैं।

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