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Abstract

भारत में संविधान सर्वोच्च है और संविधान की उद्देशिका में पंथनिरपेक्षता को अंगीकृत किया गया है। संविधान का विवेचन करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत एक ऐसा विशाल राष्ट्र है जहॉ विभिन्न धर्म, जाति, सम्प्रदाय के लोग एक साथ निवास करते है। उनके रहन-सहन, रीति-रिवाज, भाषा, संस्कृति और जीवनशैली में भिन्नता के बावजूद देश की एकता और अखण्डता की जड़े मजबूत है।


          देश में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसन्द और विश्वास के अनुसार किसी भी धर्म के मानने और पालन करने की आजादी हैं।‘विभिन्न धर्मावलम्बियों के आचरण व व्यवहार उनकी वैयक्तिक विधियों के अनुसार नियन्त्रित होते हैं। इन वैयक्तिक विधियों की विविधता का आधार एवं स्रोत राज्य विधायिका के नियम या आदेश न होकर उनकी धार्मिक पुस्तकें और उनकी समीक्षाएं होती हैं।1 इन्हें परम्परावादी विधि भी कहते है।2 प्रत्येक विधि जो किसी धर्म को मानने वालों को लागू की जा सकती है, वह विधि उस धर्म की विधि के नाम से जानी जाती है। जैसे- हिन्दू विधि, मुस्लिम विधि, इसाई, पारसी व अन्य विधियॉ। इन्हीं विधियों को वैयक्तिक विधि कहते हैं।3

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