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European Journal of Business &

Social Sciences

Available at https://ejbss.org/

ISSN: 2235-767X

Volume 07 Issue 02

February 2019

Available online: https://ejbss.org/ P a g e | 475

संत गरीबदास के विचार ंका समीक्षात्मक अध्यन

Jitender

Ph.D. in History

Email id – jitenderyadav3341@gmail.com

Research Scholar M.D.U. (Rohtak)

Haryana (India)

श ध आलेख सार - मध्यकालीन भक्ति आंदोलन नेसाहित्य के रूप मेंएक अनमोल

खजाना प्रदान हकया िै। मध्यकालीन संतोंनेस्थानीय भाषाओंके हिकास मेंमित्वपूर्ण

योगदान हदया िै। शेख फरीद और नामदेि द्वारा शुरू हक गई। एक साहिक्तत्यक परम्परा

हजसका लक्ष्य िमारेदेश की नैहतक और आध्याक्तिक उन्नहत करना था, 18िी ंसदी तक और

उसके बाद के काल तक जाती िै। इसी साहिक्तत्यक परम्परा सेरोितक के संत गरीबदास भी

संभंहदत रिेिैं।

मुख्य शब्द - दाशणहनक हिचारधारा, समानता आधाररत समाज, धाहमणक हिचार, गुरु की

मित्ता, अहिंसा, समरसता, एकान्तिाद।

श ध प्राविवध - इस शोध मेंशोधकताणनेशोध की आधार सामग्री मुख्य रुप सेएहतिाहसक

स्त्रोतोंसेग्रिर् की िै, तथा साथ - साथ कु छ मित्वपूर्णमौहलक प्राथहमक स्त्रोतोंका भी

अध्यन हकया िै।

इसके साथ - साथ शोधकताणनेव्यक्तिगत रूप सेगरीबदास धाम छु ड़ानी ( रोितक) का

भ्रमर् हकया िै, तथा ििां हिकहसत िोनेिाली समझ को भी शोध पुत्र मेंस्थान हदया िै।

गरीबदास के हिचार िालांहक अपनेक्षेत्रीय पररिेश सेप्रभाहित रिेंिै। उसी कारर् उनकी

रचनाओंमेंक्षेत्रीयता का पुट हमलता िै। परन्तुहफर भी संत गरीबदास तत्कालीन मध्यकाल

मेंउत्त्पन्न हुए भक्ति आंदोलन ि उसके प्रमुख संतो सेअछु तेनिी ंरिे और उनका प्रभाि

गरीबदास पर हदखाई देता िै।

गरीबदास के दाशणहनक हिचारोंका अध्यन हनम्न हबन्दुओंके माध्यम सेआसानी सेहकया जा

सकता िै।

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Volume 07 Issue 02

February 2019

Available online: https://ejbss.org/ P a g e | 477

पारत सेिा, पारत पूजा, पारत शाहलग्राम िे।

पारत चन्दन पारत अपणर्, परत िैओि धाम िे। पारत

हसज्या पारत आसन, परत ओि तख़्त िे।

पारतेपुजारी पूजता, जो पारत िैसब बखत िे4।

3. अव ंसा - संत गरीबदास अहिंसा के मिान पुजारी थे। उनके अनुसार जीिन

मेंसभी जीिोंका सामान रूप सेअक्तस्तत्व िैतथा िेइस संसार को समान रूप सेभोग

सकतेिैंइसहलए हकसी भी जीि को दू सरेजीि को िाहन पहुंचानेया नष्ट करनेका

अहधकार निी ंिै।

इस प्रकार िम देखतेिै, की अहिंसा की अिधारर्ा समानता के व्यापक मूल्य पर आधाररत

िै, हजसकी एक झलक हनम्न प्रकार सेदेखी जा सकती िै।

कोहट कमणजो तन हलपटाई , दासातन हबन कटेन भाई।

दासातन जो जीि के आिै, जूनो जनम न देख धरािे।।

जप , तप करनी हकरती करिी ं, दास भाि हबन , सब पर िरिी ं।।

दास भाि िै,. अगम आगाि , दासभाि सा और न लािा।।

दास भाि करिी ंरघुनाथा , दासभाि सा और न नाता।।

दास भाि करीिेआहद साई , दास भाि सेदुनी रचािी।।

दास भाि हबन लंका खोई , राज रसातल कु लहिं हबगोिी।।

दास भाि हबन िारया जनमा , आशा , तृष्णा रि गई धनमा।।

सथल मनोरथ पूर्णकाम , समरथ साहिब राजा राम।

जाके हदल मेंिै, दुचताई , दासातन आिेनिी ंभाई5।।

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