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European Journal of Business &

Social Sciences

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ISSN: 2235-767X

Volume 06 Issue 12

December 2018

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महा×मा गांधी कȧ आͬथ[क ͪवचार व वत[मान मɅĤासांͬगकता

सुनील कु मार

शौधाथȸ

राजीनǓत ͪव£ान ͪवभाग

महͪष[ दयानÛद ͪवæवͪवɮयालय, रोहतक।

शोध सार

Ĥèतुत शोध पğ मɅ महा×मा गांधी के आͬथ[क ͪवचारɉ कȧ समकालȣन समय मɅ

उपयोͬगता पर ͪवचार ͩकया गया है। इसमɅ यह भी बताया गया है ͩक महा×मा

गांधी के आͬथ[क ͪवचार ͩकस Ĥकार मानव सßयता को ͪवनाश से बचा सकते है।

इस शोध पğ मɅ गांधी के आͬथ[क ͪवचारɉ कȧ आधु Ǔनक सßयता कȧ अथ[åयवèथा

के साथ तुलना करके Ǒदखने का Ĥयास ͩकया है। िजससे समाज के ͧलए गांधीवादȣ

अथ[åयवèथा कȧ Ĥासंͬगकता का पता चल सके ।

मुÉय शÞद

Ħेड लेबर, Įम ͪवभाजन, मशीनीकरण, Ěèटȣͧशप, कु टȣर उɮयोग, Ĥासांͬगकता

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महा×मा गांधी कȧ आͬथ[क ͪवचार व वत[मान मɅ Ĥासांͬगकता

भारत के राçĚͪपता, आजादȣ के नायक, राजनीǓतक दाश[Ǔनक समाज सुधारक

व मानवता के पथĤदश[क महा×मा गांधी के सàपूण[ ͪवचार मानव सßयता के ͧलए

अ×यंत आवæयक व लाभदायक है। उनके ͪवचार एक सàपूण[ मानव जीवन का

दश[न समेटे हु ए है। उनके सभी ͪवचारɉ पर चचा[ करना तो एक साथ संभव नहȣ है,

इसͧलए Ĥèतुत शोधपğ मɅ हम गांधीजी के आͬथ[क ͪवचारɉ पर संͯ¢Üत चचा[ करɅगे

तथा उनकȧ वत[मान मɅ हमारे ͧलए Èया Ĥासांͬगता है इस पर ͪवचार करɅगे।

आज भूमÖडीकरण, मशनीकरण व ͫडजटलȣकरण का युग है, आज हमारा

जीवन मशीनɉ पर पूण[ Ǿप से Ǔनभ[र हो गया है। मशीनɉ ने Ǔनःसंदेह हȣ हमारȣ

जीवन को सु ͪवधाजनक बातया है ͩकं तु इनके Ĥभाव मानव सßयता हेतु अ×यंत

भयावह है। मशीनीकरण के कारण åयापक èतर पर बेरोजगारȣ, Ĥया[वरण का ıास,

Ĥदूषण, उपभोÈतावादȣ पृ वृ Ǔत, अपͧशçट कȧ समèया आǑद उ×पÛन हु ई है।

ऐसे मɅ हमɅ महा×मा गांधी के कु टȣर उɮयोग व हèतͧशãप का समथ[न करने

वालȣ उ×पादन Ĥणालȣ पर बल देना आवæयक Ĥतीत होता है। आज कȧ आͬथ[क

Ĥणालȣ कȧ कͧमयɉ का समाधान गांधीजी के आͬथ[क ͪवचारɉ मɅ देखा जा सकता है।

महा×मा गांधी के आͬथ[क ͪवचार -

गांधी जी के आͬथ[क ͪवचार उनकȧ रचना Ǒहंद èवराज (1908) मɅ देखने को

ͧमलते है। इसके अलावा उनके ͪवͧभÛन पğ पǒğकाओं मɅ भी उनके आͬथ[क ͪवचार

Ĥकट हु ऐ है। गांधी जी के आͬथ[क ͪवचार ͩकसी अथ[शाèğी कȧ भांǓत ͩकसी

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ͧसƨांत पर आधाǐरत नहȣ है। न हȣ वे इÛहɅ ͩकसी संगǑठत ͧसƨांत का नाम दते

है। उनके अनुसार - “मेरे आͬथ[क ͪवचार जीवन कȧ एक Ĥणालȣ व ढंग माğ है”

उनके आͬथ[क ͪवचार हमɅ जीवन के तरȣके मɅ पǐरवत[न करने को Ĥेǐरत करते

हैताͩक हम नैǓतक व संतुçट जीवन जी पाऐं।

उनके आͬथ[क ͪवचारɉ को Ǔनàन ǒबÛदुओं के माÚयम से समझा जा सकता

है-

1- Ĥाकृ Ǔतक संसाधनɉ का उͬचत उपयोग -

गांधी जी ने Ĥाकृ Ǔतक संसाधनो के उपयोग कȧ आधु Ǔनक Ĥणालȣ कȧ कडी

Ǔनंदा कȧ है। आज मनुçय आͬथ[क ͪवकास के नाम पर तेजी से Ĥाकृ Ǔतक संसाधनɉ

का दोहन कर रहा है। िजससे भͪवçय के ͧलए ये संसाधन शेष नहȣ रहɅगे। गांधी

जी ने कहा है - “Ĥकृ Ǔत के पास हम सबकȧ आवæयकता पूरȣ करने कȧ ¢मता है

ͩकं तु ͩकसी एक कȧ इÍछा पूरȣ नहȣ कर सकती है।” अथा[त यǑद Ĥ×येक मनुçय

अपनी-अपनी आवæयकता के अनुसार Ĥाकृ Ǔतक संसाधनɉ का Ĥयोग करे तो सभी

कȧ आवæयकता पूरȣ हो सकती है, ͩकÛतु संͬचत करते जाने कȧ होड कु छ हȣ

लोगɉ को भी संतुçट नहȣं करेगी। अतः गांधी जी Ĥाकृ Ǔतक संधानɉ के सीͧमत व

Ǔनयंǒğत उपयोग पर बल देते है।

2- Ěèटȣशीप का ͧसƨांत -

महा×मा गांधी ने समाज के आͬथ[क संसाधनɉ के èवाͧम×व का जो ͧसƨांत

Ǒदया है इसे Ěèटȣशीप या Ûयाͧसता ͧसƨांत कहते है। इस ͧसƨांत के अनुसार