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Abstract
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन ने साहित्य के रूप में एक अनमोल खजाना प्रदान किया है। मध्यकालीन संतों ने स्थानीय भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शेख फरीद और नामदेव द्वारा शुरू कि गई। एक साहित्यिक परम्परा जिसका लक्ष्य हमारे देश की नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति करना थाए 18वीं सदी तक और उसके बाद के काल तक जाती है। इसी साहित्यिक परम्परा से रोहतक के संत गरीबदास भी संभंदित रहे हैं।