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Abstract

चट्टानों का अपक्षय वह भूपृष्ठीय प्रक्रिया है जिनसे चट्टानें अपने मूल स्थान पर विखण्डित या वियोजित हो जाती हैं। इस प्रक्रम में बड़े पैमाने का परिवहन शामिल नहीं होता। इस प्रक्रम में चट्टानों का कमजोर होना, चट्टानों का टूट जाना, चट्टानों का गल जाना और चट्टानों का छोटे-छोटे टुकड़ों में विखण्डित हो जाना शामिल होता है, जिसमें वह खनिज पदार्थ घुलनशील आयन में तबदील हो जाता है या मृत्तिका खनिजों का निर्माण करता है। इस प्रक्रम में भौतिक व रासायनिक प्रक्रियाएं साथ-साथ चलती रहती है और मूल चट्टानों से रैगुलिथ अलग होता रहता है। यह अपरदन से पहले का प्रक्रम है। चट्टानों के अनाच्छादन में इस प्रक्रम का सबसे महत्तवपूर्ण योगदान होता है।

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