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Abstract
जख्म हमारे’ उपन्यास दुःख, वेदना, जातिगत हीनता दलितों पर सवर्णों के अत्याचार, साम्प्रदायिकता का दंष आदि समस्याओं से ओत-प्रोत है। साम्प्रदायिक दंगों में स्त्रियों पर होने वाले बुरे बर्ताव, बर्बरता, हिंसा आदि का मार्मिक वर्णन किया गया है। साम्प्रदायिकता के दंष ने किस प्रकार उच्च षिक्षित लोगों को भी अपने षिंकजे में कसा हुआ है, इसका वर्णन भी किया गया है।