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Abstract

महिलाएँ ईश्वर की एक अद्वितिय कृति है। वो सृष्टि की निर्माता है। समाज में उसने माँ, बहन, पत्नी, बेटी के रूप में अपना अमूल्य योगदान दिया है। प्राचीन भारत में भी महिलाओं की स्थिति पर नजर डाले तो स्थिति बड़ी विवादास्पद प्रतीत होती है। एक तरफ उसे अत्यंत सम्मान पूर्वक स्थान प्राप्त है तो दूसरी तरफ अनेकों सामाजिक बंधन है। चूंकि महिलाएँ हमारे देश की आधी आबादी का हिस्सा है। अतः यह आवश्यक है कि महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व राजनैतिक सभी स्तरों पर सशक्त बनें ताकि देश व समाज में अग्रणी भूमिका निभा सकें।

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