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Abstract
17वीं व अठाहरवीं शताब्दी के बीच तक मुगल शासन का जब पतन हुआ तो उस बीच कुछ कोर्ट - चित्रकार अपने जीवनयापन हेतु नए-नए बादशाही आश्रय खोजने लगे। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र की छोटी-छोटी रियासतों में अब भी कला अपनी नई शैली में जिन्दा थी। बसोहली, कांगड़ा, गुलेर, चम्बा, गढ़वाल, कुल्लु मण्डी, नाहन सिरमौर आदि रियासत में लघु-चित्रों की शैली में उन चित्रकारों ने नई आभा प्रकाशित की। पहाड़ों की मनोहारी प्रकृति छटा ने इन चित्रों में शैलीगत प्रभाव से अपनी भावाभिव्यक्ति प्रदान की चित्रों में मानवीय आकार वनस्पति, पेड़-पौधें, फूल पत्तिया, पशु-पक्षी एक अलंकारिक रूप में अंकित हुये व अपने आप में भारतीय कला की धरोहर साबित करते नजर आते हैं।