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Abstract
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः साहित्यकार भी एक सामाजिक प्राणी है। साहित्य और समाज का सम्बन्ध बहुत प्राचीन है। ’’साहित्य समाज का दर्पण है।’’ यह कहना है मैथ्यू आर्नल्ड का किसी काल या देश का सही चित्र यदि हम देख सकते हैं, तो उसके लिए देश के साहित्य में झांकना पड़ेगा।