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Abstract

सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों की पहचान और मानचित्रण किसी क्षेत्र के भौगोलिक विष्लेशण में पहला कदम है। वायु फोटो चित्रण के बढ़ते उपयोग के साथ, भूगोलवेत्ता अब अपने काम के इस चरण को अधिक तेजी से ओर उच्च सटीकता के साथ पूरा करने में सक्षम है। यह तकनीक संचार, दूरदर्षन, रेडियो-प्रसारण, जलवायु विज्ञान, समुद्री विज्ञान, कृशि, षिक्षा, आपदा प्रबंधन, नगरीय बस्ती नियोजन तथा प्राकृतिक संसाधनों की खोज व उनका मानचित्रण करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है। किसी भी नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र का विकास एवं नियोजन समुचित रूप से तभी संभव है, जब इन क्षेत्रों  के विस्तृत व विषुद्ध मानचित्र उपलब्ध हो

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