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Abstract
विमर्श शब्द की उत्पति ‘मृश’ धातु में ‘वि’ उपसर्ग लगाने और घ´् प्रत्यय लगाने से हुई है। (वि/मृश$घ´्) जिसका अर्थ है- वितर्क, विचारना, तथ्यानुंसधान, किसी तथ्य का अनुसंधान, विवेचना, आलोचना, युक्ति द्वारा परीक्षा करना, असंतोष, अधैर्य, अधीरता।1 डॉ. रामचन्द्र तिवारी ने विमर्श के बारे में कहा है- ‘‘इन्द्रियों के द्वारा किसी चीज या बात का अनुभव या ज्ञान होने पर मन में बनने वाला उसका चित्र या रूप। परन्तु प्रस्तुत प्रसंग में इसका दूसरा अर्थ होता है- किसी भावी कार्य या विषय के संबंध में तर्क-वितर्क और मनन के फलस्वरूप बनने वाला वह कल्पित चित्र या रूप जो हमारे मानस क्षेत्र में प्रस्तुत होता है।