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Abstract
भारत एक संघात्मक राज्य है। संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है। भारतीय संघवाद अपनी प्रकृति में अनोखा है। इसके अनेक रूप देखने को मिलते है। समय व आवश्यकता के अनुसार यह अपने स्वरूप में शिथिल और कठोर हो जाता है। शांतिकाल में संघवाद प्रभावी रहता है तो आपातकाल में यह एकात्मक रूप ग्रहण कर लेता है। इसका एकात्मक स्वरूप भी भिन्न-भिन्न समयों में अलग-अलग प्रकार का होता है। संविधान सभा में देश की शासन व्यवस्था के स्वरूप पर खुलकर बहसें हुई। तभी एक ऐसा संविधान अपनाया गया जो ‘स्वरूप में संघात्मक किन्तु आत्मा में एकात्मक‘ है। भारतीय संविधान के लागू होने के प्रांरभ से ही भारतीय संघवाद की प्रकृति पर सवाल उठाए जाते रहे है। हालाकि भारतीय संविधान संघ के सभी आवश्यक तत्वों की पूर्ति करता है। लेकिन पूरे संविधान में कहीं भी फेडरल या संघ शब्द का उल्लेख नहीं है।