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Abstract

भारत में लोकतन्त्र प्रणाली के साथ ही नये संविधान को लागू करने के लिए अनके प्रावधान बनाए गये। जिससे सही तरीके से लोकतन्त्र में जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विकेन्द्रीकरण के आधार पर शासन स्थापित करने की कोशिश की गई। 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों का संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ और उन्हें अपने स्थानीय कार्य स्वयं निस्पादित करने का अवसर मिला। इसमें महिलाओं के आरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी उनके सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ महिलाओं को स्थानीय मुद्दों व समस्याओं की जानकारी हुई। हालांकि बहुत सारी चुनौतियाँ उनके सामने हैं। फिर भी स्थानीय स्तर पर केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों द्वारा किये प्रयासों से भारत में महिलाओं की भागीदारी इसमें बढ़ी और उनकी भूमिका में वृद्वि हुई है।

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How to Cite
कुमारीड. ल. (2019). भारत में पंचायती राज और महिलाओं की भूमिका. European Journal of Business and Social Sciences, 7(1), 776-782. Retrieved from https://journals.eduindex.org/index.php/ejbss/article/view/978